जुहार, आमर माँ कोशल राएज आर आमर मातृभाषा हेला कोशली । आमर मेहेर कबी गंगाधर उडिया रे लेखी थिले
"मातृभाषा मात्रुभुमिरे ममता जा हृदे जनमी नहिं , ताकू जेबे ज्ञानी गणरे गणिबा अज्ञान रहिबे कहिं । "
सत कथा आए , आमे आमर मातृभाषा कोशली के बहुत भल पाएसुं । आमे जेते इतार प्रसार आर प्रचार करी पारमा , सेतकी जल्दी आमे कोशली भाषा के गुटै पुर्णाग भाषा भाबे सरकारी मोहर लगेई पारमा । सरकारी मोहर पछर कथा , पहेला आमे आमर दिल भीतरे मोहर लगाबार कथा जे कोशली मोर भाषा बली । आघो नीजे अपनेंई पारले तार परे जाई करी अलगा मानकु कही पारमा. आमे जेन ऊं कले , हिन्दी आर इंग्लिश रे कथा हउछुँ , सेटा बंद करबार के पड्बा . आघो आमकू आमर कोशली रे कथा हेबारके पड्बा . हेटा हेले जाईकरी आमर मातृभाषा र उन्नति हेबा . ई भाषा केन्ता करी बढबां आपण माने बिचार करून ।
जय माँ कोशल.
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